A Bhakta Asked for God. Mahabharata Story

krishna

आओ आज अर्जुन के बारे मे बात करते है, श्री कृष्ण के प्यारे सखा थे  अर्जुन श्रीमद्भगवतगीता के पान के पहले अघिकारी बने इससे हम सोच सकते है कि वे भगवान को कितने पि्य थे। एक बार अर्जुन भगवान से युद्ध मे सहायता मांगने गए, भगवान सो रहे थे । अर्जुन चरणोँ मे जाकर बैठ गए । दुयोर्धन पहले से ही भगवान के सिरहाने एक आसन पर बैठा था। श्री कृष्ण ने जागने पर सामने बैठे अर्जुन का प्रणाम स्वीकार किया और आने का कारण पूछा, फिर दुर्योधन को देखा और आने का कारण पूछा। दुर्योधन ने कहा युद्ध मे आपकी सहायता मांगने के लिए मै पहले आया हूँ,अर्जुन पीछे आया है,आप मेरी तरफ से युद्घ लङे। इस पर भगवान ने कहा आप पहले आये है यह ठीक है परन्तु मैने पहले अर्जुन को देखा है इसलिये मै दोनो की सहायता करूंगा।

भगवान ने कहा कि एक तरफ मेरी समस्त सशस्त्र यादव सेना दूसरी तरफ मै अकेला रहूंगा परन्तु मै न तो शस्त्र उठाउंगा और न युद्ध करूंगा । जिसकी जो इच्छा हो सो मांग ले परन्तु पहले मांगने का अधिकार अर्जुन का है उसे मैने पहले देखा है। अर्जुन ने सर झुकाते हुए कहा मेरे तो सर्वस्व आप है इसलिये मुझे तो केवल आप ही चाहिये। देखो, भक्त ने भगवान को मांग लिया । भक्त भोग को नही चाहता उसे तो केवल भगवान चाहिये । दुर्योघन ने कहा मुझे तो आपकी सैना चाहिये । आप जानते ही है महाभारत युद्ध मे भगवान तो अपने भक्त के सारथी तक बन गए और अपने भक्त पर आंच तक नही आने दी ।

 

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