CHIDIYA KI AANKH-LAKSHAY KI TARAF DHYAN

चिड़िया की आँख – लक्ष्य की तरफ ध्यान

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आप सभी ने सुना ही होगा जब गुरु द्रोणाचार्य धनुर विद्या सिखा रहे थे तो गुरूजी ने एक-एक कर सभी शिष्यों को बुलाया एवं पेड़ पर बैठी चिड़िया की आँख की पुतली पर निशाना साधने को कहा. एक-एक कर शिष्य आये, गुरूजी ने पूछा की तुम्हे क्या दिखाई दे रहा है? किसी ने कहा, “मुझे पेड़ दिख रहा है.” , किसी ने पत्ते टहनियां, किसी को चिड़िया दिख रही थी, किसी को पेड़ के साथ फल दिख रहे थे, फिर अर्जुन की बारी आई. गुरूजी ने उससे पूछा,” तुम्हे क्या दिखाई दे रहा है?” अर्जुन ने अपने निशाने को साधते हुए कहा ” इस समय तो मुझे केवल चिड़िया की आँख की पुतली दिखाई दे रही है, जिस पर मुझे निशाना साधना है.” गुरूजी ने बाण चलाने का आदेश दिया और बाण चिड़िया की आँख की पुतली में ही लगा.

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आप सोच रहे होंगे की आखिर ये कहानी क्यों याद दिलाई जा रही है परन्तु ये घटना इसलिए सुनाई जा रही है जिससे हमें अपना लक्ष्य पता हो और हम लक्ष्य से न भटकें. हमारा लक्ष्य राधा दास्याम- राधा रानी की किंकरी बनना है. जब हम इस लक्ष्य की तरफ बढ़ने लगते हैं तो सबसे पहले हमें पूरा पार्क, उसमे कितने ही पेड़ दिखाई देते हैं अर्थात हमें भक्ति की तरफ मुड़ते हुए हज़ारों रास्ते दिखते हैं. कहाँ जाए, कहाँ न जाए – निर्णय लेना कठिन होता है. परन्तु हमें अपना लक्ष्य पता हो, किंकरी (मंजरी) बनना तो हम उसी परंपरा में जायेंगे.

अगली सीढ़ी आती है – हमें हमारा पेड़ तो मिल गया परन्तु पेड़ पर हमें सब कुछ दिख रहा है , कोई शिव जी का भक्त , कोई माता रानी का भक्त , कोई श्री राम का भक्त , कोई श्री कृष्ण का भक्त, कोई अन्य देवताओं का अर्थात हमें पेड़ पर टहनियां , पत्ते, फल, फूल, चिड़िया सब कुछ दिख रहा है. हमें अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते हुए, चिड़िया, अर्थात – श्री राधा कृष्ण दिखने चाहिए. अब अपनी आँखें स्थिर करते हुए हमें फिर लक्ष्य की तरफ बढ़ना है.

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अब हमें केवल चिड़िया की आँख अर्थात केवल श्री राधा रानी दिखनी चाहिए. आगे पीछे क्या हो रहा है , हमें कुछ भी पता नही होना चाहिए. कुछ और आगे बढ़कर अब हमें अपना लक्ष्य अर्थात केवल आँख की पुतली (किंकरी/मंजरी) ही दिखना चाहिए अर्थात इतने बड़े पार्क में जहाँ हज़ारों पेड़, पक्षी, जानवर, पवन, झरने सब होते हुए भी हमें केवल चिड़िया की आँख की पुतली दिखनी चाहिए.

उसी प्रकार इतनी बड़ी दुनिया में जहाँ करोड़ों सुविधाएं, भोग विलास, सुख सम्पदा, काम वासना भरी पड़ी है उस जगत में हमें केवल राधा किंकरी ही दिखनी चाहिए. तभी हम अपने लक्ष्य को पा सकेंगे और वह भी इसी जन्म में|

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इस जन्म में हमे सभी सुविधाये प्राप्त है ,जैसे भारत देश में जन्म,गौरांग महाप्रभु द्वारा प्रदत्त मंजरी भाव ,सद्गुरु ,गुरुपरंपरा,और तो और हमे कदम कदम पर श्री  गुरु कृपा मिलती है | हमारी योग्यता से कही अधिक श्री  गुरु हमे कृपा दे देते है|कमी तो हममे ही होती है की हम इन सुविधाओं का लाभ नही उठा पाते |

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लक्ष्य की तरफ बढ़ने  के लिए श्री गुरु के चरणों का आश्रय हमें लेना ही पड़ेगा , उनके निर्देशन में – लक्ष्य की तरफ बढ़ना पड़ेगा| वे जो भी कहें , हमें (अपनी बुद्धि लगाए बिना) उनका पालन करना है. उनके निर्देशों में किन्तु परन्तु नही लगाना और उनके कहने का अक्षरक्शः पालन करना है.

आईये हम सभी परम पूजनीय श्री गुरुमाँ के चरणों का सहारा लेकर अपने लक्ष्य युगल किशोर की सेवा, किंकरी/मंजरी बनकर  प्राप्त करने की तरफ बिना रुके आगे बढ़ते चले |

जय जय श्री राधे ||

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