jai jai nitai chand

tn_037_shri-krishna-chaitanya-prabhu-nityananda-theप्रेम के सागर में डूबा
आँख जिसपर पड़ गयी
नेत्रों से निकलती धार देख
नास्तिकों की आँख भर गयी
माया के दासों ने है  पाया
असली स्वामी का पता
पहली दफ़ा पाया है सबने
दास होने का मज़्ज़ा ।।1।।जय जय निताइ जय जय निताइ
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जय जय निताइ चाँद रे!
कंचन सी लम्बी बाहों में
आलिंगन जिसे मिल गया
मक्खन के जैसा दिल हुआ
भक्ति की शक्ति भड़ गयी
मस्ती भरी उस चाल से
पृथ्वी का तल मचल गया
आनंद की भाड़ ऐसी आयी
महिना लम्हे सा गुज़र गया ।।2।।जय जय निताइ जय जय निताइ
जय जय निताइ चाँद रे!img-20150104-wa00062

 

जन्मों के पापों का सारा खाता
पल भर में आज मिट गया
लोगों की ऐसी किस्मत जागी
कुछ किये बिना ही सब मिल गया
जो प्रेम ब्रह्मा ने न पाया
वो आज यूँ ही बट गया
आज भी मिलता है प्रेम उसको
जिसने भी इनका नाम लिखा ।।3।।

जय जय निताइ जय जय निताइ
जय जय निताइ चाँद रे!

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