SIX GOSWAMI- शठ गोस्वामी

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भगवान के  नाम-जप को ही वैष्णव धर्म माना जाता  है, और श्री राधाकृष्ण को प्रधानता दी गई है। गौरांग महाप्रभु  ने इन्हीं की उपासना की और नवद्वीप से अपने छः प्रमुख अनुयायियों को वृंदावन भेजा तथा  वहां सप्त देवालयों की आधारशिला रखवाई। श्री चेतन्य महाप्रभु  ने जिस गौड़ीय संप्रदाय की स्थापना की थी। उसमें षड्गोस्वामियों की अत्यंत अहम भूमिका है । इन गोस्वामियो  ने भक्ति आंदोलन को व्यवहारिक स्वरूप प्रदान किया। साथ ही वृंदावन के सप्त देवालयों के माध्यम से विश्व में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया।

रसिक कवि श्री जीव गोस्वामी शठ गोस्वामी गणों में है ,उन्होंने परमार्थिक नि:स्वार्थ प्रवृत्ति से युक्त होकर सेवा व जन कल्याण के जो अनेकानेक कार्य किए वह स्तुति करने योग्य  हैं।श्री जीव गोस्वामी , हरि-नाम में रुचि, जीव मात्र पर दया एवं वैष्णवों की सेवा करना उनके स्वभाव में था। वह मात्र २० वर्ष की आयु में ही सब कुछ त्याग कर वृंदावन में अखण्ड वास करने आ गए थे। निम्न छह गोस्वामी है :-

  • श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी

    , बहुत कम आयु में ही गौरांग महाप्रभु  की कृपा से यहां आ गए थे। दक्षिण भारत का भ्रमण करते हुए महाप्रभु  चार माह इनके घर पर ठहरे थे। बाद में इन्होंने गौरांग के नाम संकीर्तन में प्रवेश किया।

  • श्री रघुनाथ भट्ट  गोस्वामी :- सदा हरे कृष्ण का अन्वरत जाप करते रहते थे और श्रीमद भागवतम का पाठ नियम से करते थे। राधा कुण्ड के तट पर निवास करते हुए, प्रतिदिन भागवत का  पाठ स्थानीय लोगों को सुनाते थे और इतने भावविभोर हो जाते थे, कि उनके प्रेमाश्रुओं से भागवत के पन्ने भी भीग जाते थे।
  • श्री रूप गोस्वामी   इन्होंने २२ वर्ष की आयु में गृहस्थाश्रम त्याग  दिया था। बाद के  वर्ष ये ब्रज  में ही रहे। इन्होने अनेक ग्रन्थ लिखे  जोकि  साधको के लिये  भक्ति में आगे बड़ने के लिए रास्ता दिखाते है |
  • श्रीसनातन गोस्वामी :- चैतन्य महाप्रभु के प्रमुख शिष्य थे। उन्होने गौड़ीय वैष्णव भक्ति सम्प्रदाय की अनेकों ग्रन्थोंकी रचना की। अपने भाई रूप गोस्वामी सहित वृन्दावन के छ: प्रभावशाली गोस्वामियों में वे सबसे ज्येष्ठ थे।
  • श्री जीव गोस्वामी , . श्री जीव के चेहरे पर सुवर्ण आभा थी, इनकी आंखें कमल के समान थीं, व इनके अंग-प्रत्यंग में चमक निकलती थी। श्री रूप गोस्वामी इनके गुरु और चाचा  थे श्री जीव  वृंदावन पहुंचकर  वहां इन्होंने श्री रूप से भागवतम कि गहराई जानी  तथा वहां  एक मंदिर भी बनवाया।
  • श्री रघुनाथ दास गोस्वामी :-इन्होने  युवाअवस्था  में ही गृहस्थी का त्याग किया और गौरांग महाप्रभु  के साथ हो लिए थे। ये चैतन्य के सचिव स्वरुप दामोदर  के निजी सहायक रहे। श्री स्वरुप दामोदर के संग ही इन्होंने गौरांग महाप्रभु के पृथ्वी पर अंतिम दिनों में दर्शन भी किये।

इन गोस्वामियो ने वृदावन  में सात वैष्णव मंदिरों की स्थापना की। वे इस प्रकार हैं:-गोविंददेव मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, मदन मोहन मंदिर, राधा रमण मंदिर, राधा दामोदर मंदिर, राधा श्यामसुंदर मंदिर और गोकुलानंद मंदिर। इन्हें मंदिरों को  सप्तदेवालय कहा जाता है।

जय जय श्री राधे

One thought on “SIX GOSWAMI- शठ गोस्वामी

  • Sep 27, 2016 at 2:42 pm
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    हरे कृष्ण, हरे कृष्ण!
    भक्तिरस प्रवाह की आपकी इस साईट पर अनायास आ कर आनंद हुआ. अपराध क्षमा करें: ऊपर ‘शठ’ शब्द के स्थान पर ‘षट’ अथवा ‘षड’ का प्रयोग करें जो छ: के लिए प्रयुक्त होता है, ‘शठ’ अनर्थमूलक शब्द है. संशोधन उपरांत ये टिपण्णी हटाने की अनुकम्पा भी करें.

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