Sri Sri Premdhara Mataji Quotes In Hindi

Bhagwaan के भक्तों में दोष ना देखें

  • अगर भक्त क्रोधी दिखे|भक्त लोभी दिखे या भक्त में आपको कोई अन्य शारीरिक दोष दिखे कि अरे ये तो बूढा है|अरे देखो हमेशा इसे बुखार ही रहता है|हमेशा ये तो कैसे लंगराता-लंगराता ही आता है|ये तो इतना मोटा है|ये तो इतना काला है|ये तो ये है|ये तो वो है|अगर आप ऐसे देखेंगे भक्त को तो आप बहुत बड़े पाप के अधिकारी हो जायेंगे|
  • भगवान कहते हैं कि अलबत्ता तो भक्त में दोष होता ही नही लेकिन अगर अपने past संस्कारों की वजह से,पुराने संस्कारों की वजह से उसने कुछ गलत कर भी दिया है|तो भगवान कहते है -मैंने माफ किया क्योंकि ये मेरा अनन्य भाव से भजन करता है|
  • जो भगवान के भक्त हैं उनके अंदर कई बुराईयां आपको दिख सकती हैं|बड़ा आलसी है,बडा कठोर है,पता नही कौन से घराने से आया है|बावजूद इसके आपको,हमें उन्हें कभी प्राकृत रूप में नही देखना है कि वो material व्यक्ति है|material नही है वो|वो divine है|वो भगवान के भक्त हैं इसीलिए वो divine हैं|दैवीय हैं|
  • जो भक्त हैं, वो क्या कर रहे हैं,क्या नही ,ये वो जाने और भगवान जाने| मगर वो हमेशा रहते महापवित्र ही हैं क्योंकि भगवान की नजर उन पर रहती है|
  • नजर-ऐ-इनायत भगवान की भक्तों पर रहती है|
  • ये जो भक्त है अगर ये कहीं भी कदम रख ले तो वो जगह तीर्थस्थान हो जाती है|
  • हे भगवान जो तुम्हारा नाम लेते हैं वो चाहे ऐसे परिवार से ही क्यों न हो जो कुत्ता खाते हैं|निकृष्ट परिवार से ही क्यों न आये हो|पर आपका नाम अगर ले रहे हैं तो उन्होंने पिछले जन्मो में अनेकानेक तपस्याएं की हैं|पवित्र नदियों में वो नहाये हैं|उन्होंने समस्त शास्त्रों का अध्ययन किया हुआ है|बड़े दान दिए हैं|ऐसे ही नही उनके मुख पर आपका नाम आ गया है|ऐसे लोग बहुत पूजनीय है|बहुत पूजनीय है|
  • हमें कभी भी किसी भी भक्त के अंदर उसकी शारीरिक कमियों को नही देखना है|

भक्त अपराध की सजा

  • जो शुद्ध भक्तों का मजाक उड़ाता है वो अपना पुण्य खो बैठता है|
  • जो भी भक्तों का उपहास करता है उसके ऐश्वर्य,उसकी प्रतिष्ठा और पुत्र नष्ट हो जाते हैं|
  • जो भी भक्तों का मजाक उड़ाता है वो अपने पितरों समेत महारौरव  नामक नरकमें जा गिरता है|
  • जो भक्तों को मारता है या उनकी निंदा करता है या उनसे ईर्ष्या करता है या उनपर क्रोध करता है,उन्हें नमस्कार नही करता,उन्हें देखकर प्रसन्न नही होता वो व्यक्ति नरक को जाता है|

Sadhna Related Quotes

  • जिनकी सुकृतियाँ एकत्र हो गयी हैं वही तो भजन कर पाते हैं|वरना आप संसार में किसी को भी कहो कि भाई भजन कर लो भगवान का ज़रा|दो घड़ी तो कहेंगे कि हमारे पास time नही है|हर व्यक्ति बोलेगा कि हमारे पास time नही है|ये time की बहुत problem है|time की बड़ी shortage है|बाकी चीजों के लिए हमारे पास बहुत time होता है|हम तीन-तीन घंटे फिल्म देख लेते हैं|चार-चार घंटे सीरियल देख लेते हैं|उनके लिए बहुत time है लेकिन भक्ति करने के लिए हमारे पास time नही होता है|अजीब बात है|very strange|
  • भगवान वो कुम्हार हैं जो घड़े को बनाएंगे|मिट्टी ने तो कुम्हार की शरण ले ली है|बस शरण लेना बहुत जरूरी है|मिट्टी अगर ये समझ के उछलती रहे कि अरे मै स्वतन्त्र हूँ|तो बेकार हो गयी मिट्टी|कभी गढी नही जायेगी|सुन्दर रूप उसका नही आएगा सामने|
  • जो भगवान के प्यारे भक्त हैं वो शरीर की क्रियाओं पर इतना ध्यान नही देते|वो शरीर को उसकी क्रिया करने देते हैं ताकि शरीर fit रहे और भगवान के भजन में काम आ सके|
  • देखा जाए तो हमारा शरीर मिला ही भगवान के भजन के लिए है|इसका और कोई उद्देश्य नही है|
  • गया हुआ समय कभी भी वापस नही आता|इसलिए आईये संकल्प ले कि हम एक लम्हे को भी जाया नही होने देंगे|सदा-सर्वदा भगवान से युक्त रहेंगे और भगवद प्राप्ति में अग्रसर होंगे|
  • हमे भगवान के प्रति अपने ह्रदय में भाव जागृत करने है|अगर तुम्हारे मन में ऐसे सुन्दर-सुन्दर भाव भगववान के लिए उठाते हैं तो वही सबसे अच्छी बात है|
  • अगर आपके घर की परिस्थिति ऐसी है कि आपके पति पसंद नही करते,आपी सास पसंद नही करती,कोई और पसंद नही करता आपके भक्तिमय कार्य को|तो प्रयास कीजिये कि उअसे छुपाकर किया जाए|क्या जरूरी है ऐलान करना|बिल्कुल जरूरी नही है|
  • प्रेम को तो यूं भी दिल में रखा जाता है|है न|
  • आपके जीवन में एक मार्गदर्शक हो जो स्वयं भक्ति करता हो और भक्ति का रसास्वादन उसे प्राप्त होता हो,वो इतना सक्षम हो कि आपको भी रसास्वादन करा पाए|आपको पग-पग पर दिशा निर्देश दे पाए कि इसतरह से चलो और ऐसे भक्ति करो|ऐसे मार्गदर्शक के आनुगत्य में भक्ति करना ज्यादा श्रेयस्कर है|


Bhagwaan के नाम की महिमा

  • भगवान का नाम लेती रहिये|आपकी जिह्वा जब भगवान के नाम में रत हो जायेगी तो भगवान् आपके अन्दर ऐसे संस्कार डाल देंगे|ऐसी प्रेरणा डाल देंगे जिससे आप उनकी और ज्यादा सेवा कर पायेंगे|
  • भक्ति की शुरुआत कीजिये भगवान् का नाम लेने से|भगवान का नाम लेते जाईये और भगवान का नाम लेने से जब आपका चित्त शुद्ध होने  लगेगा तो फिर आगे की सेवाएं आपको स्वयं पता चल जायेंगी और आप आगे स्वयं बढ़ते चले जायेंगे|
  • आप भगवान का नाम लेते रहिये|भगवान का नाम लेते रहने से आपका मन शुद्ध हो जाएगा और आपका मन भगवान में लगेगा|
  • जब आप भगवान के नामो का कीर्तन करते हैं और उसे सुनते हैं या आप हरिकथा सुनते हैं तो इससे आप भगवान के प्रति प्रेम को विकसित कर लेते हैं|

Bhagwaan के बारे में

  • जैसे चन्द्रमा एक ही है न लेकिन विभिन्न दिनों में जब आप उस चन्द्रमा को देखते हो तो कभी छोटा,कभी और छोटा,बिलकुल पतला-सा नजर आता है |तो आप ये नही कह सकते कि पूर्णिमा का चाँद अलग है और ये पतला-सा चाँद अलग है|ये तो चाँद ही नही है|ये तो बेकार है|ऐसा नही कह सकते|
    इसीप्रकार से भगवान विभिन्न प्रयोजनों के हिसाब से अपने अंश को भेजते हैं और वो प्रयोजन पूरा हो जाता है तो भगवान के अंश अपने धाम में चले जाते हैं|तो यही अवतार होता है|
  • ये जो समय है दिन और रात|ये हमारे लिए है|हम जैसे बद्ध जीवात्माओं के लिये है|भगवान के लिए तो क्या दिन और क्या रात|सब सामान है|
  • हम भगवान् की वजह से हैं|हमारा जो वजूद है उनकी वजह से है|पर जैसे सूर्य की किरण उसके अन्दर नही है|वो बाहर है|इसीप्रकार से हम भगवान के अन्दर की शक्ति नही हैं बाहर हैं|विभिन्नांश कहा गया है हमे|separated energy हैं हम भगवान की|
  • भगवद्गीता जैसा ग्रन्थ शायद ही कोई हो|
  • भगवान ही एकमात्र तत्व हैं पूरे संसार में और हमारी आत्मा का सम्बन्ध भी उसी एक तत्व से है,भगवान् से है|
  • तो भगवान बता रहे हैं कि जो तुमने यह मायाजाल रचा हुआ है न|इस मायाजाल को काटने के लिए मैंने आपको अस्त्र भी प्रदान कर दिए हैं|सुंदर दो अस्त्र आपको दिए हैं-मन और बुद्धि|भगवान कहते हैं कि इन अस्त्रों को इस्तेमाल करो और ये जो भवबंधन है उसे काटकर मेरे पास आ जाओ|मुझे प्राप्त कर लो|मै बाहर खड़ा हूँ|हाथ फैलाये|और चाभी तुम्हारे पास है|है न|
  • भगवान ये कहते हैं कि मन और बुद्धि भगवान को समर्पित कीजिये ताकि आप अंततः भगवान को प्राप्त कर पाए|
  • भगवान् माया से और उससे उत्पन्न शारीरिक कोटियों से परे हैं| मेरी और आपकी शारीरिक कोटि है| एक आत्मा अगर कुत्ते के शरीर में चली जाती है तो उसे कुत्ता कहते हैं| एक आत्मा बिल्ली के शरीर में चली जाती है तो उसे बिल्ली कह देते हैं| इंसान के शरीर में चली जाती है तो वो मानव है| तो हम शारीरिक कोटियों में फंसे रहते हैं| विभिन्न शरीरों में | चौरासी लाख प्रकार के शरीरों में हम फंसे रहते है| लेकिन भगवान् को इन शरीरों में फंसने की जरुरत  नही है|
  • परम इच्छा शक्ति रहती है भगवान् में|वो अपने संकल्प मात्र से कुछ भी कर सकते हैं|उन्होंने इच्छा की और भगवान् की जो ऐश्वर्या शक्ति है उस इच्छा को तुरंत पूरा कर देती है|तुरंत|इच्छा करते ही पूरी हो जाना|सोचा कि ये ब्रह्माण्ड हो जाए ब्रह्माण्ड बन गया|सोचा की इसमे विविधताएं उत्पन्न हो जाये,योनियाँ हो जाए, वैचित्री उत्पन्न हो जाए वो उत्पन्न हो गयी सोचते ही|सोचिये|

सबसे दुःख की बात

  • भगवान कहते है कि भैया सारे जीव जो है न, मेरे अंश हैं|लेकिन अपनी इन्द्रियों के विषयों में अपने मन को इस कदर डुबो दिया है कि वे इस भयंकर जगत में संघर्ष कर रहे हैं|हैं मेरे अंश पर मेरे पास आना नही चाहते|
  • हम भगवान का अंश होते हुए भी जब भगवान् के पास ही नही जाना चाहते तो भगवान भी क्या करे|
  • तो सोचिये यही,यही एक ताज्जुब की बात है कि भगवान कहते हैं कि आप मेरी तरफ आओ|मै आपको मुक्त कर दूंगा|तो भी सिर्फ मुट्ठी भर लोग ही उनकी तरफ क्यों मुड़ते हैं?क्यों बाकी लोग गृहस्थी का बहाना बनाकर भगवान से कट जाते हैं|भगवान को अपनी जिंदगी में कोई अहमियत नही देते|
  • अगर आप सच में विद्वान कहलाना चाहते हैं तो आपको ये खुशी और गम इससे ऊपर उठना पडेगा |

भक्ति Related Quotes

  • भक्ति करने के लिए ही इंसान का शरीर मिला है|
  • भगवान को प्रसन्न करने का नाम ही तत्व भक्ति है|
  • प्रभु की भक्ति करने के लिए ही तो मनुष्य जीवन मिला है|
  • भक्ति नौ प्रकार की होती  है अर्थात् नौ प्रकार से आप भगवान को भज सकते हैं-श्रवण,कीर्तन,स्मरण,पादसेवन,दास्यम्,अर्चनं,वन्दनं,साख्यम् और आत्मनिवेदनम्|नौ तरीके हैं जिससे आप भगवान का भजन कर सकते हैं|उनकी भक्ति कर सकते हैं लेकिन कलयुग में सबसे important श्रवण और कीर्तन को बताया गया है|
  • भक्त की परिभाषा ही यही होती है कि वो अपनी इन्द्रियों को निर्मल कर देता है.कैसे?भगवान नाम के जाप से या फिर भगवान की याद से या फिर किसी भी प्रकार से भगवान से जोड़  करके.उसकी इन्द्रियाँ निर्मल हो जाती हैं.विमल हो जाती हैं|

आपको भक्ति युक्त कर्म करना होगा

  • अपने सांसारिक कर्तव्यों को पूर्ण करिए निर्लिप्त भाव से और लिप्तता सिर्फ भगवान में रखिये|यही एकमात्र सही तरीका है|
  • भगवान ने कहा है कि जहाँ भी आप हैं,जो कुछ कर रहे हैं करते रहिये|किसी चीज को छोडने की जरूरत नही है|कुछ मत छोडिये लेकिन मेरा चिंतन अवश्य कीजिये|कैसे ,सर्वेषु कालेषु,हर वक्त,हर समय,हर पल,हर क्षण मेरा स्मरण करते रहिये|
  • हम भगवान तक पहुंच सकते हैं,भगवान को याद करके|
  • अगर आपको कोई संबंध नजर नही आता तो आप कोई संबंध बना लीजिए|कोई संबंध जोड़ लीजिए|फिर उस संबंध को पोषित कीजिये|धीरे-धीरे,धीरे-धीरे आप उस संबंध के आदी हो जायेंगे और जब वो संबंध आप भगवान से अच्छी तरह से जोड़ लेंगे तब आपको आदत हो जायेगी भगवान के बारे में सोचने की|यही तरीका है जिससे आप हर समय,हर क्षण भक्ति कर सकते हैं और आपका समय भी जाया नही होगा|
  • जैसे कि अगर सरकार किसी सैनिक को यह आज्ञा देती है कि वह front पर जाकर लड़ाई करे और वे जब अधिकाधिक शत्रुओं का वध करते हैं तो फिर सरकार उन्हें मेडल देती है|यह पाप नही है|इसीप्रकार जब भगवान की आज्ञा है की आप जाकर के आतातायी लोगों का वध करे|अधर्म का नाश करे और धर्म की स्थापना कीजिये तब ये पाप नही है|
  • अर्जुन ने एकबार कहा कि मै जाकर के संन्यास ले लेता हूँ|किसी गुफा में बैठकर के भगवान का नाम लूँगा|ये हिंसा मुझे नही करनी है|तो भगवान ने कहा कि नही,ये तो आपका कर्त्तव्य है क्योंकि आप योद्धा है,क्षत्रिय हैं|
  • अगर एक student कहे ,एक विद्यार्थी कहे कि नही मुझे तो भगवान का नाम लेना है ,मुझे पढ़ाई नही करनी|तो आप इस श्लोक से सीख सकते हैं|भगवान कहते हैं कि नही,पढाई करनी है|अपने कर्त्तव्य को पूर्ण करना हैऔर उस पढाई को भी मुझे समर्पित कर दो|और जब तुम ऐसा करोगे तो उस कार्य से बंधोगे नही|
  • भगवान कहते है कि तुम मेरा चिंतन करो|मेरे बारे में सोचो,मेरे ख्यालों में डूबो|तुम ऐसा करोगे तो तुम सारे कामों को करते हुए भी मुक्त रहोगे और मुझे प्राप्त कर पाओगे|
  • भगवान ने कहा है कि आप कितने ही कार्यों को करे,कोई समस्या नही है|पर आपके विचार मुझ तक आने चाहिए|
  • भगवान ने कहा है कि आपके विचारों में मेरा वास होना चाहिए|मन से भगवान का चिंतन करना है|मन से|और बुद्धि से भगवान की शरण ग्रहण करनी है|मन और बुद्धि को भगवान के चरणकमलों में स्थिर करना है|
  • दुनिया में आप जो कुछ भी करते हैं वो सब कुछ असत है अगर उसका सम्बन्ध भगवान से न हो|

इसी जन्म में भगवत प्राप्ति होनी चाहिए : No Matter What !!

  • भगवान बताते हैं कि आप सारे कार्य करना लेकिन मुझे प्राप्त करने का प्रयास जरूर करना|ये न हो कि अपने कार्यों में आप इतने मगन हो जाए कि मुझे प्राप्त करने के बारे में आप सोचे ही न|
  • भगवान को प्राप्त करने का प्रयास करिये तो ये जितने भी आपके कष्ट है न, वे कष्ट जैसे होंगे ही नही|वस्तुतः कष्ट रहेगा ही नही|
  • आप सोचे कि बुढ़ापे में भगवान  को प्राप्त करने के बारे में सोचेंगे|ये गलत ख्याल है|इसीलिए तो भगवान ने कहा है कि बुढ़ापा क्यों?बचपन से आप अपना काम कीजिये|खेलना है खेलिए|लेकिन मन और बुद्धि यदि भगवान में लगे रहेंगे तो किसी भी काम से,किसी भी कर्म से आप बंधेंगे नही|
  • आप जो कहते हैं कि हम बुढ़ापे में भक्ति कर लेंगे तो पता नही कि बुढ़ापा आएगा कि नही आयेगा|वर्तमान समय ही सबसे उत्तम है|वर्तमान समय को हाथ से जाने न दीजिए|इसी में भक्ति कीजिये और भगवान रूपी रत्न को प्राप्त कीजिये|
  • बहुत ही मुश्किल से ये सुदुर्लभ अवसर आपको प्राप्त होता है मनुष्य रूपी जीवन का जिसमे आप अपनी समस्त समस्याओं से सदा-सर्वदा के लिए छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं|बारम्बार जन्म  लेना,बारम्बार मरना,ये सारी जो सब समस्याएं हैं,जीवन के कारण जो समस्याएं हैं सबसे सदा के लिए मुक्ति हो सकती है|यदि आप इसी जीवन में भगवद्भक्ति प्राप्त कर ले तो|
  • भगवान हर जगह हैं|लेकिन हर जगह से भगवान को निकाल लेना,हर जगह में भगवान को देख पाना इसके लिए आपको प्रशिक्षण लेना पड़ेगा|आपको Training लेनी पड़ेगी|जब आप किसी व्यक्ति से जो कि तत्वविद हो,तत्व ज्ञानी हो,जो भगवद तत्व को जानता हो,उससे ये प्रशिक्षण लेंगे कि भगवान को कैसे देखा जाए तो मै आपको बताती हूँ कि आप भगवान को समझ पायेंगे और आपको भगवान जगह नजर आयेंगे|
  • पंछी जब शाम को घर लौटते हैं तो उनकी चोंच में कल के लिए कोई दाना नही होता|लेकिन हम कल के बारे में ही सोचते रहते हैं|आज को बिसरा देते हैं|
  • भगवान को आप तभी प्राप्त कर सकते हैं जब आप मन को भगवान में लगाये|लेकिन मन जब तक जगत में लगा रहेगा|जब तक आप इस जगत में सुख ढूंढते रहेंगे तब तक आपका मन भगवान में लगने वाला नही है|
  • जिसदिन आप इस दुनिया के सुखों से बोर हो जायेंगे,उब जायेंगे और आपको इस दुनिया से मिलनेवाले सुख में कोई नवीनता नजर नही आयेगी|जब आपका मन नवीन रस के लिए मचल उठेगा|जब आपका मन ये जानना चाहेगा कि कैसे इस दुनिया के जंजाल से मै छुटकारा पाऊं?क्या करूँ मैं?जब आपको यहाँ का कोई सुख सुखी नही कर पायेगा तभी आपका मन भगवान के चरणों में जाएगा|
  • भगवान जानते हैं कि इंसान उन तक न आने के लिए बहुत बहाने बनाता है|इसीलिए तो भगवान कहते हैं :
    हे अर्जुन!तुम्हे सदैव कृष्ण रूप में मेरा चिंतन करना चाहिए और साथ ही युद्ध करने के कर्त्तव्य को भी पूरा करना चाहिए|अपने कर्मों को मुझे समर्पित करके तथा अपने मन एवं बुद्धि को मुझमे स्थिर करके तुम निश्चित रूप से मुझे प्राप्त कर सकोगे|

Bhagwaan से क्या मांगना चाहिए ?

  • भगवान से जुडिये और भगवान से भगवान को मांगने कि बुद्धि पैदा कीजिये|इसी में आपका सर्वोच्च  कल्याण है|याद रखिये|
  • भगवान बता रहे हैं कि देखिये आपको अगर कोई वर चाहिए न तो आप एक ही वर मांगना|वह वह ऐसा है कि आपको हमेशा-हमेशा के लिए मुक्त कर देगा|इस जीवन में रहते हुए आप मुक्त हो जायेंगे|आप सिर्फ मेरे चरणकमलो की सेवा मांगिये|
  • एक शुद्ध भक्त भगवान से उनके चरण कमलों की सेवा के अतिरिक्त और कुछ नही चाहता|
  • लेकिन जो व्यक्ति भगवान से कुछ भी न मांगकर सिर्फ उनकी सेवा मांगता है वो व्यक्ति बहुत ऊँचे platform पर स्थित होता है|वो बहुत शुद्ध भक्त होता है|
  • भगवान ने आपको आपके वो सारे रिश्ते-नाते दिए जिनपर आप गर्व करते हैं|सबकुछ भगवान ने दिया|इसपर भी भगवान जब आप पर प्रसन्न होते हैं तो आपसे कहते हैं कि आप हमसे कुछ वर माँगिये और तब भी हमारी जो demands है खत्म नही होती|
  • हम कभी नही सोचते कि हे भगवान!आप हमारे लिए इतना कुछ करते हैं|इतना कुछ आपने हमें दिया|हमने आपको क्या दिया?हम कभी ये नही सोचते|हम सोचते हैं कि नही,भगवान का काम है देना और भगवान को उसी कसौटी पर हम मापते हैं कि क्या भगवान ने हमारी इच्छा पूरी कि?अगर नही तो हम भगवान को बदल देते हैं|किसी और को भगवान बना लेते हैं|
  • आप शायद जानते नही हैं कि आप जिसप्रकार के वर की कामना करते हैं, भगवान कहते हैं कि वो अन्तवत्तु हैं|वो समाप्त हो जायेंगे|ऐसे वर आपके साथ नही जायेंगे|
  • अगर आप बुद्धिमान है तो वर इसप्रकार के मांगिये जो आपके साथ जा सके|भगवान से भक्ति मांगिये ताकि आपका जीवन सफल बन सके|
  • भगवान के चरणकमलों की सेवा मांगना किसी आम आदमी के वश की बात नही है|ये खास आदमी ही करेगा|ऐसा आदमी जिसके मन से सारी कामनाएँ खत्म हो चुकी होंगी|

सिर्फ Bhagwaan के लिए कामनाए & इच्छाएं करें

  • देखिये वास्तव में ये possible नही है कि मन से सारी कामनाएँ खत्म हो जाए|लेकिन हाँ ये possible है,ये संभव है कि उन कामनाओं का रूप बदल जाए|
  • आपकी कामनाएं अब भगवान के लिए हो|सारी कामनाएँ विमल हो जाए|सारी कामनाएँ भगवान से जुड़ जाए|जब ऐसा हो जाता है तभी एक भक्त भगवान के चरणकमलों की सेवा मांगता है|
  • भगवान के चरणकमलों में ही कोई व्यक्ति निर्भय रह सकता है|
  • भगवान कहते भी हैं न कि अगर आप मेरी सेवा करेंगे तो मै आपका योग क्षेम वहन कर लूँगा|
  • तो असली मुक्ति है कि आप अपनी इच्छाओं से मुक्त हो जाएँ और भगवान के हो जाए|भगवान के चरणकमलों की सेवा के अतिरिक्त आपके अंदर और कोई इच्छा कभी भी शेष न रहे|
  • सिर्फ मेरा,मेरा,मै,मेरा| जो व्यक्ति इसप्रकार की सोच रखता है वो प्रभु को सपने में भी प्राप्त नही कर सकता|वो जो भी काम करेगा उसे अंततः निराशा ही हाथ लगेगी|
  • भगवान ने कहा है कि जो काम तुम कर रहे हो उसे मुझे अर्पित कर दो|मेरे लिए काम करो|अपने लिए मत सोचो|

Natural Calamities Quotes

  • कभी सोचा है आपने कि मौसम इतना क्रूर कैसे हो गया है|मौसम वाले कहेंगे कि मानसून disturbed हो गया है|ये हुआ,वो हुआ|पर सच तो ये है कि जब समाज में पाप बढ़ते हैं और लोग भगवान को याद नही करते|अंधाधुंध अपने स्वार्थ को साधते है तो यही होता है|तब प्रकृति हमें दण्डित करती है|
  • तो भाई सीधी सी बात ये है कि जब तक हम भगवान की संपत्ति का भोग बिना भगवान को शुक्रिया अदा किये करते रहेंगे तब तक हमें प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना ही पडेगा|
  • भगवान को प्रेम करना सीखिए ताकि जो धरती हमें ढो रही है वो धरती प्रसन्न हो सके और हमारे जो मौसम हैं,हमारी प्राकृतिक सम्पदाएं है वो खूब-खूब अधिक हो सके|आपको प्रसन्न कर सके|

Other Quotes

  • सब लोग भगवान का शुक्रिया अदा करना सीखिए|
  • भगवान स्वयं कहते है कि जो मेरे पास आ जाता है वो उदार आत्मा है|
  • अगर आप अपने शरीर की क्रियाओं को मात्र द्रष्टा बनकर देखे और आप उसमे लिपटे नही तो आप प्रबुद्ध व्यक्ति कहलायेंगे|
  • हम शरीर से अलग हैं|हम शरीर नही हैं|हम शरीर हो भी नही सकते क्योंकि हम चेतन हैं और शरीर जड़ है|

Manjari Bhav Upasana

  • मंजरी भाव उपसना का अर्थ है युगल के सुख में सुखी होना |
  • मंजरियाँ अपने सुख के बारे में सोचती ही नहीं, वह तो यह देखती है कि राधा कृष्णा सुखी है एक दुसरे से| राधा रानी अगर कृष्ण के साथ मिल के ही सुखी हो सकती है तो कृष्ण के साथ अभिसार कराती है| अगर कृष्ण कहीं चले गए तो उन्हें पकड़ के लाती है| अगर राधा रानी उदास हो गई, नाराज़ हो गई, मान हो गया और कृष्ण को उन्होंने भगा दिया| तो उन्हें पता है के मान तो कर रही है, भगा भी दिया, पर अभी रोने लग जाएंगी के क्यों भगा दिया| तो वो फिर राधा रानी को भी समझती है और वहां से कृष्ण को भी ले कर आती है| तो युगल सुख ही मंजरियों को अभिप्राय है|
  • राधा रानी कृष्ण के साथ, कृष्ण राधा रानी के साथ और भी सुंदर लगने लगते है, वह कौन देखता है? राधा रानी सिर्फ कृष्ण को देखती है, कृष्ण सिर्फ राधा रानी को देखते है, मंजरियाँ दोनों को देखती है| तो मंजरियाँ ज्यादा किस्मतवाली है, दोनों की सुन्दरता देखते है|
  • मंजरियाँ होती है राधा स्नेहादिका किंकरीयां| जो युगल से बहुत प्रेम करती है| राधा कृष्ण से बहुत प्रेम है उन्हें लेकिन राधा रानी से ज्यादा है| राधा सुख के लिए है| राधा दास्याम|
  • गोस्वामी गण हमे सुनते है| गोस्वामी गणों से मांगना क्या है ? राधा दास्याम, मंजरी भाव, गुरु का अनुगत्य और उस अनुगत्य में चलते हुए लक्ष्य तक पहुँचना है|

Atma Related Quotes

  • यदि हमारा मन इस भौतिक जगत में लग गया तो हम बहुत-बहुत आसक्त कहलायेंगे.और यदि हम आसक्त हो गए  तो फिर हमें लौटकर दुबारा यही जन्म लेना पडेगा.
  • अगर आप यहाँ दुबारा जन्म लेते हैं तो इसका अर्थ ये है कि आपने आत्महत्या कर ली. आत्महत्या यानि आत्मा की हत्या.
  • ये जो शरीर है वो जड़ है और इस शरीर के अंदर रहनेवाला जो तत्त्व है ,जिसकी वजह से ये शरीर चलायमान है वो तत्त्व,आत्मा है.वही हमारी असली पहचान है.वही हम है.
  • एक आत्मा का एक आत्मा से संबंध होता भी है तो सिर्फ इसलिए कि वो परमात्मा का अंश है.वरना शरीर का संबंध शरीर के साथ है और शरीर मर्त्य है.याद रखिये.

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